विवाह और संगति · 3 लेख

विवाह और संगति

कुंडली मिलान, अष्टकूट, और शास्त्रीय संगति ढाँचे।

भकूट दोष (राशि कूट) विवाह मिलान में — सम्पूर्ण विवेचन

संक्षिप्त उत्तर: भकूट दोष वैदिक कुंडली मिलान में पहचानी जाने वाली एक अनुकूलता-संबंधी कमी है, जो तब उत्पन्न होती है जब वर और वधू की चंद्र राशियाँ परस्पर कुछ विशेष अशुभ अनुपात — विशेष रूप से 2-12, 5-9 या 6-8 — में स्थित हों। अष्टकूट पद्धति में यह कूट 7 में से 0 अंक प्रदान करता है। इसे परंपरागत रूप से विवाह में स्वास्थ्य, आर्थिक अथवा भावनात्मक तनाव से जोड़ा जाता है।

मंगल दोष और विवाह: प्रभाव, मिलान के नियम और उपाय

संक्षिप्त उत्तर: मंगल दोष वैदिक ज्योतिष की एक कुंडली-स्थिति है, जिसमें मंगल ग्रह जन्म कुंडली के छह संवेदनशील भावों — 1, 2, 4, 7, 8, या 12 — में से किसी एक में स्थित होता है। शास्त्रीय ग्रंथ इसे विवाह में कलह, विलंब या संघर्ष से जोड़ते हैं। हिंदू विवाह से पूर्व दोनों पक्षों की कुंडलियों में इस स्थिति का मिलान करना एक सर्वमान्य परंपरा है।

कुंडली मिलान: वैदिक विवाह अनुकूलता की संपूर्ण व्याख्या

कुंडली मिलान — जिसे *गुण मिलान* या जन्मपत्री मिलान भी कहते हैं — विवाह से पूर्व दो जन्म-कुंडलियों की तुलना करने की वह व्यवस्थित प्रक्रिया है, जिससे दीर्घकालिक अनुकूलता, पारस्परिक सामंजस्य और सुखमय दाम्पत्य जीवन की संभावना का आकलन किया जाता है। शास्त्रीय ज्योतिष की गहरी जड़ों से पोषित यह पद्धति *बृहत् पाराशर होरा शास्त्र* जैसे मूलभूत ग्रंथों पर आधारित है। यह लेख इस प्राचीन विज्ञान के प्रत्येक आयाम को विद्वत्तापूर्ण दृष्टि से समझाता है।